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The picture of Hadoti will change Bundi will become a city of stepwells Ramgarh crater will also be recognized Om Birla | हाड़ौती की बदलेगी तस्वीर, बूंदी बनेगा बावड़ियों का शहर, रामगढ़ क्रेटर को भी मिलेगी पहचान- ओम बिरला

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Kota-Bundi: नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में आयोजित केंद्र और राजस्थान सरकार के पर्यटन मंत्रालय की बैठक में हाड़ौती में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाये गये .केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी और संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की मौजूदगी में आयोजित बैठक में स्पीकर बिरला ने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस बनने का सबसे ज्यादा फायदा सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा और झालावाड़ को मिलेगा.

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बैठक के दौरान बताया गया कि बूंदी को बावड़ियों के शहर के रूप में विकसित किया जाएगा. बारां स्थित रामगढ़ क्रेटर को भी वैश्विक मानचित्र पर लाने और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने के प्रयास होंगे. रणथम्भौर, रामगढ़ विषधारी और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व भी प्रदेश में पर्यटन का नए आयाम देंगे. केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी और संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि केंद्र सरकार राजस्थान में पर्यटन के विकास के लिए प्रतिबद्ध है. इसके लिए राज्य सरकार से जो भी प्रस्ताव आएंगे उन्हें केंद्र सरकार प्राथमिकता से स्वीकृत करने का प्रयास करेगी. बैठक में लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता, आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ और केंद्र एवं राज्य पर्यटन मंत्रालय के कई अधिकारी भी मौजूद रहे.

आध्यात्मिक सर्किट भी किया जाएगा विकसित
हाड़ौती में आध्यात्मिक सर्किट को भी विकसित किया जाएगा. इसमें बूंदी के केशवरायपाटन स्थित केशवराय मंदिर, कोटा के मथुराधीश मंदिर और झालावाड़ में कौल्वी की गुफाओं समेत हाड़ौती के प्रमुख पर्यटक स्थलों को शामिल करते हुए आध्यात्मिक सर्किट भी तैयार होगा.

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एडवेंचर ट्यूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
स्पीकर बिरला ने कहा कि चंबल हाड़ौती समेत पूरे राजस्थान के लिए वरदान है. चंबल में वाटर सफारी के साथ एडवेंचर स्पोट्र्स को भी बढ़ावा दिया जाएगा. चंबल नदी में ही भारत का एकमात्र राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य है. इसमें घड़ियालों का संरक्षण करते हुए पर्यटकों को यहां तक लाने की कोशिश की जाएगी.

ग्रामीण और एग्री ट्यूरिज्म पर भी फोकस
बिरला ने कहा कि हाड़ौती में ग्रामीण और एग्री ट्यूरिज्म की भी संभावनाएं तलाश की जाएंगी. कोटा डोरिया जैसे हस्तशिल्प को ग्रामीण पर्यटन का हिस्सा बनाया जाए. कोटा-बूंदी सहित सम्पूर्ण हाड़ौती क्षेत्र कृषि का एक बड़ा केंद्र हैं. यहां चावल, गेंहू, धनिया, संतरे, अमरूद की खेती प्रचूर मात्रा में होती है. यहां अब आर्गेनिक कृषि को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. इसको देखते हुए इस क्षेत्र को एग्री ट्यूरिज्म को भी विकसित करने की विपुल संभावनाएं हैं.

मेलों को दिलाएंगे नई पहचान
बूंदी फेस्टीवल और कोटा के दशहरा मेले को नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करेंगे. बैठक में स्पीकर बिरला ने कहा कि राजस्थान के मेलों के प्रति भी पर्यटकों में आकर्षण है. इन मेलों की सोशल मीडिया के जरिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए विशेषज्ञ एजेसियों का सहयोग लिए जाने की जरूरत है.

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